जिले में इन दिनों आयोजित सरस मेला सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण बनकर उभर रहा है. मेले में देसी और हस्तनिर्मित सामानों की स्टॉल पर लगी लोगों की भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं का हुनर अब ब
News Pratyaksh | Updated : Tue 27th Jan 2026, 12:22 pm
जिले में इन दिनों आयोजित सरस मेला सिर्फ एक मेला नहीं, बल्कि महिलाओं की मेहनत, हुनर और आत्मनिर्भरता का जीवंत उदाहरण बनकर उभर रहा है. मेले में देसी और हस्तनिर्मित सामानों की स्टॉल पर लगी लोगों की भारी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण महिलाओं का हुनर अब बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है.खासतौर पर जे.एस.एल.पी.एस (Jharkhand State Livelihood Promotion Society) के सहयोग से स्वावलंबी बनी महिलाएं आज पूरे समाज को यह संदेश दे रही हैं कि महिलाएं अब किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं. एक समय था जब घर की आर्थिक जिम्मेदारी सिर्फ पुरुषों के कंधों पर होती थी, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. अब महिलाएं न सिर्फ घर संभाल रही हैं, बल्कि परिवार की अर्थव्यवस्था की एक मजबूत नींव भी बन चुकी हैं.सरस मेला में साहिबगंज से आईं सिकु मंडल ने बताया कि झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जे.एस.एल.पी.एस) से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया. टेडी बियर बनाकर आज वह न सिर्फ खुद के पैरों पर खड़ी हैं, बल्कि पूरे परिवार का भरण-पोषण भी कर रही हैं. उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूह के जरिए काम मिलने से पहले उनका परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.वहीं, कारोबारी आरती कुमारी का कहना है कि जे.एस.एल.पी.एस महिलाओं के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने में अहम भूमिका निभा रहा है. हालांकि उन्होंने लोन पर लगने वाले ब्याज को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि अगर ब्याज दरों में कमी या समाप्ति हो जाए, तो महिलाएं और भी सशक्त बन सकती हैं. उनका मानना है कि सरकार अगर इस दिशा में कदम उठाए, तो महिला सशक्तिकरण की रफ्तार कई गुना तेज हो जाएगी.