बिहार की सियासत में अब महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती जा रही है
News Pratyaksh | Updated : Fri 19th Sep 2025, 09:54 am
बिहार की सियासत में अब महिलाओं की भूमिका निर्णायक होती जा रही है. आधी आबादी के वोट की ताकत को समझते हुए नीतीश सरकार ने महिलाओं के लिए योजनाओं की झड़ी लगा दी है. नीतीश कुमार ने भत्ता के जरिये सत्ता के लिए रोजगार, उद्यमिता, भत्ता, पेंशन से लेकर आरक्षण देने की घोषणा कर रही है. वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी महिलाओं को लुभाने के लिए बड़े वादे कर रहे हैं. चुनावी रण में इस बार महिलाएं सिर्फ मतदाता नहीं, बल्कि किंगमेकर बनकर उभर रही हैं.बिहार सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए हाल ही में कई बड़ी योजनाओं की घोषणा की है. महिलाओं के लिए विशेष रूप से नीतीश सरकार की ओर से पिछले 2 महीने में ही कई योजनाएं शुरू करने का फैसला लिया जा चुका है. नौकरी और रोजगार में भी उनको तरजीह दी जा रही है. स्वरोजगार के लिए भी राशि दी जा रही है दूसरी तरफ विपक्ष ने भी बड़ा वादा किया है माई बहिंन मान योजना में ढाई हजार रुपए देने का.मुख्यमंत्री महिला उद्यमी योजना के तहत अब तक 608.91 रुपये करोड़ की राशि महिलाओं को वितरित की जा चुकी है. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लिए ग्रामीण विकास विभाग को 20,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं. सरकार ने 2,43,227 रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का फैसला भी लिया है, जिससे हर महीने 500 करोड़ से अधिक का खर्च आ रहा है.पेंशन और प्रोत्साहन पर बड़ा खर्च: सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत 1.13 करोड़ पेंशनधारियों को हर महीने 1263.95 करोड़ दिए जा रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं. स्नातक छात्राओं को दो साल तक भत्ता देने के फैसले से भी सरकार पर करोड़ों का भार आएगा. इसके अलावा, ममता और आशा कार्यकर्ताओं की प्रोत्साहन राशि बढ़ाई गई है, जिस पर भी सरकार करोड़ों खर्च कर रही है. इन योजनाओं के जरिए सरकार आधी आबादी को साधने में जुटी है.