Bihar


केंद्रीय मंत्री और जेडीयू अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने बुधवार को अपने ऊपर एफआईआर पर पहली प्रतिक्रिया दी है.

News Pratyaksh | Updated : Wed 05th Nov 2025, 11:37 am
केंद्रीय मंत्री और जेडीयू अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने बुधवार को अपने ऊपर एफआईआर पर पहली प्रतिक्रिया दी है. ललन सिंह ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष है. वीडियो को आधा दिखाया गया है. पूरा वीडियो देखा जाए. एफआईआर हुआ है तो पूरा वीडियो देखा जाएगा.ललन सिंह ने दी सफाई: ललन सिंह ने कहा कि आरजेडी ने भ्रामक वीडियो पोस्ट किया है. जिस गांव में वीडियो बनाया गया, वहां एक राजद नेता गरीबों को धमकाते हैं. 15 से 27 वार्ड तक जो गरीब रहते हैं उनको डराया धमकाया जा रहा है. कहा जा रहा है कि वोट देंगे तो 6 इंच छोटा कर देंगे. उन्हीं मतदाताओं को मैं उत्साहित कर रहा था. ललन सिंह ने आरजेडी पर हमला करते हुए कहा कि पंडारक की घटना पर ट्वीट करें और क्षमा मांगे. लोगों को बूथ पर न जाने के लिए डराया जाता है, इसलिए मैंने कहा था कि अगर नेता गरीबों को धमकाते और डराते हैं, तो गांव के लोगों को उन्हें घर में बंद कर देना चाहिए.आरजेडी ने एक्स में वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था कि केंद्रीय मंत्री ललन सिंह चुनाव आयोग की छाती पर बुलडोज़र चढ़ाते हुए कह रहे कि गरीबों को वोटिंग के दिन घर से निकलने नहीं देना है. वायरल वीडियो पर चुनाव आयोग ने संज्ञान लेते हुए ललन सिंह से 24 घंटे के अंदर जवाब मांगा था और फिर उनपर एफआईआर दर्ज किया गया था.

महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित हुए तेजस्वी यादव ने मंगलवार सुबह फिर से बड़ा एलान कर दिया है।

News Pratyaksh | Updated : Tue 04th Nov 2025, 11:27 am
महागठबंधन में मुख्यमंत्री चेहरा घोषित हुए तेजस्वी यादव ने मंगलवार सुबह फिर से बड़ा एलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है तो माई बहिन योजना के तहत एक साल की पूरी राशि यानी 30 हजार एकमुश्त महिलाओं के खाते में भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद 14 जनवरी को हमारी सरकार 1 साल का पूरा पैसा माता बहनों के खाते में भेज देगी।तेजस्वी यादव ने कहा कि हम लोगों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि सरकार बनने के साथ ही जीविका (कम्युनिटी मोबिलाइजर) को स्थाई करेंगे उन्हें हर महीने 30 हजार रुपये दिया जाएंगे। किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त में देंगे। यानी सिंचाई में बिजली का खर्चा सरकार देगी। अभी राज्य सरकार 55 पैसा प्रति यूनिट लेती है। लेकिन, हमारी सरकार इसे मुफ्त कर देगी। राज्य के व्यापार मंडलों के 8463 पैक्स को जनप्रतिनिधि का दर्जा दिया जाएगा। इधर, हर परिवार को नौकरी देने के लिए बजट कहां से लाएंगे? इस सवाल पर तेजस्वी यादव ने कहा कि हमलोगों ने एक्सपर्ट से विचार के बाद हर परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का एलान किया है। भाजपा की बातों को छोड़िए। जब नौकरी देंगे तो उन्हें भी पता चल जाएगा कि कुछ भी असंभव नहीं है। तेजस्वी यादव ने हर चीज को संभव कर दिखाई है।

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मोकामा में सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं का रोड शो विवादों में घिर गया है। रोड शो खत्म होने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के खिल

News Pratyaksh | Updated : Tue 04th Nov 2025, 11:26 am
बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मोकामा में सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के नेताओं का रोड शो विवादों में घिर गया है। रोड शो खत्म होने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता व केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। आरोप है कि जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह के लिए चुनाव प्रचार कर रहे दोनों नेताओं ने मोकामा में रोड शो कर चुनाव आचार संहिता और प्रशासनिक नियमों की खुलेआम उल्लंघन किया। आरोप यह भी है कि रोड शो के दौरान भीड़ नियंत्रण, अनुमति और सुरक्षा से जुड़ी कई शर्तों का पालन नहीं किया गया। चुनाव आयोग के निर्देशों के बावजूद एनडीए के इन दिग्गज नेताओं ने मोकामा की सड़कों पर विशाल जनसमूह के साथ रैली निकाली।

नालंदा की धरती इन दिनों सिर्फ फसलों से नहीं

News Pratyaksh | Updated : Tue 04th Nov 2025, 11:26 am
नालंदा की धरती इन दिनों सिर्फ फसलों से नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के चुनावी जोश से भी लहलहा रही है। धान की खुशबू में अब राजनीति की महक घुल गई है, चौपालों पर बहस, गलियों में चर्चाएं और हर दिल में एक ही सवाल गूंज रहा है, “इस बार सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी?” जब अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ नालंदा पहुंचा, तो लगा मानो लोकतंत्र की धड़कन यहीं सबसे तेज चल रही हो। कहीं उम्मीदों की आहट है, कहीं नारों की आवाज, और बीच में जनता, जो अपने वोट से बिहार के भविष्य की नई कहानी लिखने को तैयार है। वैसे भी नालंदा ज्ञान की भूमि रही है। सियासी रूप से देखें तो लंबे वक्त से सीएम नीतीश कुमार का यह क्षेत्र गढ़ रहा है।सुबह चाय की चर्चा पर यहां के स्थानीय निवासी अर्पित कुमार सिन्हा कहते हैं कि कोई संशय नहीं है। एनडीए के प्रत्याशी की जीत तय है। केंद्र में एनडीए की सरकार है। यहां लंबे समय से नीतीश का प्रभाव रहा है। काम भी बहुत हुआ है। सड़कें अच्छी बनी हैं। विकास लोगों को दिखता है, इसमें कोई संशय नहीं है। पूरे बिहार में यातायात के लिए रोड की जरूरत थी, डबल इंजन की सरकार ने इसे पूरा किया है। पहले हम सड़कों पर चलते थे तो शाम तक जिला और राज्य मुख्यालय पर नहीं पहुंच पाते थे। आज तीन से चार घंटे में आप कहीं भी पहुंच सकते हैं। रोजगार के मुद्दों पर सिन्हा कहते हैं कि रोजगार का सृजन हुआ है। मेरे मोहल्ले में 50 लोगों को काम मिला है। एनडीए का दबदबा है।वहीं, अरुण कुमार कहते हैं कि यहां NDA के आलावा कोई नहीं दिख रहा है। अच्छी सरकार है। और इससे अच्छी कोई सरकार समझ में हमें नहीं आता है। लालू राज जैसे बुरे दिन हमने नहीं देखेगा। अगर नीतीश रहेंगे तो आने वाले समय में और भी बहुत कुछ होगा। लालू का सरकार लाठी की सरकार है। हम अब नहीं चाहते हैं कि उनकी सरकार आए। हम देख रहे हैं कि जो योग्य है वो कहीं न कहीं नौकरी पा ही लेता है। नौकरी करने में पलायन क्या बात है? यदि आप केंद्र के साथ काम करेंगे तो क्या दूसरे राज्य नहीं जाएंगे आप? तो ये कैसे पलायन हुआ।

बिहार में चुनाव आयोग ने एक रिर्पोर्ट निकाली

News Pratyaksh | Updated : Tue 04th Nov 2025, 11:25 am
बिहार में चुनाव आयोग ने एक रिर्पोर्ट निकाली है. पहले कहा जा रहा था कि कुछ नेपाली और बांग्लादेशी बंगाल की सीमा और नेपाल की सीमा से नागरिक मतदाता सूची में शामिल होएंगे. इस पर चुनाव आयोग ने एक रिर्पोर्ट बनाई है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि बिहार के बार्डर पर स्थित अररिया और किशनगंज में SIR की मतदाता सूची में एक भी विदेशी मतदाता नहीं पाया गया हैं. अररिया के जिलाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि 1.4 लाख के करीब मतदाताओं के नामों को हटाया गया था. यह सभी या तो अनुपस्थित, कहीं और रह रहे थे या मृत पाए गए थे. इस सूची में किसी भी विदेशी का नाम नहीं मिला हैं. आपको बता दे कि कुछ संदिग्ध लोगों को नोटिस भेजा गया था. उन सभी लोगों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को शामिल करने के लिए बोला गया था, जिसके बाद जांच में पाया गया कि सभी ने वैध दस्तावेजों को जमा किया. SIR में एक भी विदेशी मतदाता नही पाया गया हैं. अररिया के जिलाधिकारी अनिल कुमार ने बताया कि 1.4 लाख के करीब मतदाताओं के नामों को हटाया गया था. यह सभी या तो अनुपस्थित, कहीं और रह रहे थे या मृत पाए गए थे. इस सूची में किसी भी विदेशी का नाम नहीं मिला हैं. आपको बता दे कि कुछ संदिग्ध लोगों को नोटिस भेजा गया था. उन सभी लोगों को नागरिकता से जुड़े दस्तावेजों को शामिल करने के लिए बोला गया था, जिसके बाद जांच में पाया गया कि सभी ने वैध दस्तावेजों को जमा किया. SIR में एक भी विदेशी मतदाता नही पाया गया हैं. इसी में किशनगंज में रहने वाले एक नागरिक मोहम्मद हफीज ने कहा कि यहां कई लोग उत्तर बंगाल में चाय के बागानों में काम कर अपनी आजीविका को चलाते हैं. सीमा के खुले होने के कारण यह मुमकिन है लेकिन सीमा के बंद होते ही सब ठप पड़ जाता है. वहां के स्थानीय मुखिया अनुपमा ठाकुर ने कहा कि विदेशी मतदाता जैसे मुद्दे को बस बढ़ा-चढ़ाकर बोला गया है. तो इसी के साथ मोहम्मद इस्लामुद्दीन ने कहा कि जो लोग अलग- अलग जगह बिहार नेपाल और बंगाल तीनो जगह से जुड़े रहते है. उनके दस्तावेज अधूरे होते है. लेकिन इस बार किसी भी ऐसे बेगुनाह का नाम नहीं काटा गया है. इस के अलावा एक नागरिक मोहम्मद मिंतुल्लाह ने कहा कि लोगों की असली समस्या बाढ़ और रोजगार है. उनकी असली समस्या घुसपैठ नहीं है.

बिहार की इस मिट्टी में एक पुरानी कहावत है कि यहां धूल सिर्फ उड़ती नहीं, इतिहास भी लिखती

News Pratyaksh | Updated : Tue 04th Nov 2025, 11:25 am
बिहार की इस मिट्टी में एक पुरानी कहावत है कि यहां धूल सिर्फ उड़ती नहीं, इतिहास भी लिखती है...और इसी धूल में खड़े होकर तारतर की सड़क पर लोगों ने फिर से गुजरा हुआ बिहार देखा। उसे देखने और समझने अमर उजाला की टीम भी पहुंची।युवाओं को बिहार में या मोकामा में वह दौर नहीं चाहिए, जब सत्ता की भाषा बंदूकों व कारतूसों से लिखी जाती थी। वोट सिर्फ मत नहीं, ताकत की घोषणा हुआ करते थे। नब्बे के दशक में अखबारों की सुर्खियां...कहीं अपहरण, कहीं नरसंहार, कहीं चुनावी हत्याएं थीं। लालू-राबड़ी शासन और जंगलराज का शब्द उसी समय राजनीतिक शब्दावली में स्थायी जगह ले गया। जहानाबाद की धरती पर नक्सली सेनाएं और प्रतिहिंसक जन्म यानी रणवीर सेना बनी थी। तब यहां की रातें सिर्फ अंधेरी नहीं, बल्कि खौफ से सनी होती थीं। यही वह पृष्ठभूमि थी जिसमें बिहार की राजनीति में बाहुबली अध्याय फूटा। कोई जाति के बुर्ज पर खड़ा होकर ताकत दिखाता था तो कोई अपराध व राजनीति की साझेदारी से साम्राज्य चलाता था। तब चुनाव क्षेत्र नहीं, इलाके कहलाते थे। शासन दिल्ली-पटना से आकार पाती थी, असली कानून स्थानीय सरकार तय करती थी। इन्हीं कहानियों के बीच मोकामा भी एक केंद्र बना बिहार के सबसे धनवान इलाके मोकामा में राजनीतिक वर्चस्व में हुई हत्या और जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह की गिरफ्तारी के बाद मामला पूरे बिहार में गरमाया है। पर, उससे भी महत्वपूर्ण बिंदु है सियासत पर इसका असर क्या है? अब मोकामा का युवा उस दौर को देखना नहीं चाहता, जहां जातीय श्रेष्ठता का बोध या गुटबंदी यहां के आकाश पर अपराध और दहशत की कालिमा लगाने को तैयार हो।
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