Bihar


SC ने CBI जांच और एक्सपर्ट कमिटी बनाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया :

News Pratyaksh | Updated : Tue 30th Jun 2026, 12:12 pm
SC ने CBI जांच और एक्सपर्ट कमिटी बनाने की याचिका पर सुनवाई से इनकार किया : बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को इस मामले में पहले पटना हाईकोर्ट का रुख करने की सलाह दी। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता विशाल तिवारी ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने और सीबीआई जांच की मांग की। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पहले हाईकोर्ट जाना चाहिए।याचिका में दावा किया गया था कि भरत भूषण तिवारी की कथित "एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग" की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही कहा गया कि किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस को दंड देने वाली संस्था नहीं बनने दिया जा सकता, क्योंकि यह अधिकार केवल न्यायपालिका के पास है। गौरतलब है कि भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की 17 जून को पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई थी। परिवार का आरोप है कि उन्होंने पहले ही आत्मसमर्पण कर दिया था और हथियार भी फेंक दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। मामले को लेकर विवाद बढ़ने के बाद बिहार सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।

बिहार में JDU नेता के पिता की हत्या :

News Pratyaksh | Updated : Sat 27th Jun 2026, 12:04 pm
बिहार में JDU नेता के पिता की हत्या : बिहार के नालंदा निवासी और दिल्ली जदयू के प्रदेश महासचिव नीतीश कुमार के पिता भूषण सिंह की निर्मम हत्या का मामला सामने आया है. यह वारदात पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत भदौर थाना क्षेत्र में घटित हुई है. वह मूल रूप से नालंदा के गोविंदपुर गांव के निवासी थे और वर्तमान में यहां रहकर खेती करते थे.नीतीश कुमार के अनुसार उनके पिता भूषण सिंह रोजाना की तरह गुरुवार शाम दूध सेंटर पर दूध देने गए थे. रात नौ बजे तक वापस नहीं आने पर परिजनों ने खोजबीन शुरू की. उनका फोन भी रिसीव नहीं हो रहा था. इसके बाद दिल्ली जा रहे पुत्र नीतीश कुमार ने गांव के कुछ लड़कों को भेजा, जिन्होंने बरूआने गड्ढ़े में भूषण सिंह का शव बरामद किया. पुत्र के मुताबिक भूषण सिंह के शरीर पर गोली के निशान पाए गए हैं और उनके गले में गमछे का फंदा लगा हुआ था. हत्यारों ने हत्या करने के बाद शव को घसीटकर गड्ढे में फेंक दिया था. इस खौफनाक वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है.

Anthropic के AI मॉडल Mythos 5 को मिली आंशिक राहत, अमेरिकी सरकार ने चुनिंदा कंपनियों को दी एक्सेस

News Pratyaksh | Updated : Sat 27th Jun 2026, 11:58 am
Anthropic के AI मॉडल Mythos 5 को मिली आंशिक राहत, अमेरिकी सरकार ने चुनिंदा कंपनियों को दी एक्सेस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Anthropic को अमेरिकी सरकार से बड़ी राहत मिली है। कंपनी ने जानकारी दी है कि अब अमेरिका की कुछ चुनिंदा साइबर सिक्योरिटी कंपनियों को उसके एडवांस्ड AI मॉडल Mythos 5 का उपयोग करने की अनुमति दे दी गई है। इसे पहले लागू प्रतिबंधों में आंशिक ढील के रूप में देखा जा रहा है। कुछ समय पहले अमेरिकी प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए Mythos 5 की एक्सेस पर रोक लगा दी थी। सरकार का कहना था कि मॉडल के सुरक्षा तंत्र में कुछ ऐसी कमियां हैं, जिनका दुरुपयोग किया जा सकता है। इसी वजह से 12 जून को कंपनी के दो अत्याधुनिक AI मॉडल्स की पहुंच तत्काल प्रभाव से सीमित कर दी गई थी। Anthropic और अमेरिकी सरकार के बीच मतभेद पहले भी सामने आ चुके हैं। कंपनी ने अपनी AI तकनीक का उपयोग बड़े पैमाने पर निगरानी (Mass Surveillance) और स्वायत्त हथियारों (Autonomous Weapons) में करने की अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बाद पेंटागन ने कंपनी के कुछ अनुबंध समाप्त कर दिए थे, जिससे दोनों पक्षों के संबंधों में तनाव बढ़ गया। अब कंपनी का कहना है कि वह अमेरिकी प्रशासन के साथ लगातार बातचीत कर रही है, ताकि भविष्य में Mythos 5 की पहुंच और अधिक उपयोगकर्ताओं तक बढ़ाई जा सके। इसके अलावा कंपनी अपने दूसरे AI मॉडल Fable 5 को भी दोबारा व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है।

खान सर को फिलहाल राहत, गिरफ्तारी पर 30 जून तक रोक बरकरार

News Pratyaksh | Updated : Sat 27th Jun 2026, 11:55 am
खान सर को फिलहाल राहत, गिरफ्तारी पर 30 जून तक रोक बरकरार पटना सिविल कोर्ट में खान ग्लोबल स्टडीज के संचालक फैजल खान उर्फ खान सर की अग्रिम जमानत याचिका पर शनिवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कदमकुआं थाना पुलिस ने मामले से संबंधित अपडेटेड केस डायरी अदालत के समक्ष प्रस्तुत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केस डायरी का अध्ययन करने के लिए तीन दिनों का समय लिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 जून को होगी। अदालत ने अगली सुनवाई तक खान सर की गिरफ्तारी पर रोक बरकरार रखी है। यानी 30 जून तक उन्हें इस मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिलेगी। गौरतलब है कि खान सर ने अपने खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अब सभी की नजरें 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां कोर्ट इस मामले में आगे का फैसला ले सकती है।

बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। रिपोर्ट के अनुसार भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। जानकारी के मुताबिक, घटना के बाद शाहपुर पुलिस गंभीर रूप से घायल

News Pratyaksh | Updated : Sat 27th Jun 2026, 11:53 am
बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। रिपोर्ट के अनुसार भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं। जानकारी के मुताबिक, घटना के बाद शाहपुर पुलिस गंभीर रूप से घायल भरत तिवारी को इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल लेकर पहुंची थी। उस समय अस्पताल के सर्जन डॉ. एम.एच. अंसारी ने भी बताया था कि उनके शरीर के निचले हिस्से और पैर में 4 से 5 गोलियां लगी थीं। वहीं, मृतक की मां आशा देवी ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि उन्हें स्थानीय प्रशासन की जांच पर भरोसा नहीं है। उन्होंने न्याय के लिए हाई कोर्ट से लेकर दिल्ली तक जाने की बात कही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस एनकाउंटर को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और प्रशासनिक जांच दोनों तेज होने की संभावना है।

कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू वर्षों से बंद है :

News Pratyaksh | Updated : Fri 26th Jun 2026, 11:53 am
कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू वर्षों से बंद है : किसी भी विकसित देश और प्रगतिशील राज्य की रीढ़ उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था होती है. सरकारें योजनाएं बनाती हैं, करोड़ों का बजट जारी होता है, चमचमाती इमारतें खड़ी की जाती हैं और फीते काटकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब इन दावों की हकीकत जमीन पर उतरती है, तो वे अक्सर प्रशासनिक उदासीनता और बदहाली का शिकार होकर दम तोड़ देती है.बिहार के कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू आज इसी कड़वी हकीकत का सबसे जीता-जागता और दर्दनाक उदाहरण बन चुका है. साल 2011 में जब इस हाई-टेक यूनिट का उद्घाटन हुआ था, तब इसे सीमांचल और कटिहार के लाखों गरीब मरीजों के लिए एक 'संजीवनी' के रूप में देखा गया था. उम्मीद थी कि अब गंभीर मरीजों को इलाज के लिए सिलीगुड़ी, पूर्णिया या पटना की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी.कटिहार सदर अस्पताल का आईसीयू अब स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली का ऐसा प्रतीक बन गया है, जिसे देखकर लगता है कि इलाज की जरूरत मरीजों से ज्यादा खुद आईसीयू को है. करोड़ों रुपये की लागत से बना भवन, महंगी मशीनें और बड़े बड़े दावे- सब कुछ मौजूद है, बस मरीजों के इलाज की सुविधा गायब है.